इश्क़ छुपता है छुपाने से कहाँ, यह खुद बे खुद सामने आता है

शायरी नंबर एक 

इश्क़ छुपता है छुपाने से कहाँ,

यह खुद बे खुद सामने आता है,

नही बचता इस से कोई भी कभी,

यह सब को ही बड़ा तड़पता है

शायरी नंबर दो 

जुनून ए इश्क़, नही रास आया हमें,

जब भी देखा आईना,

अक्स उनका ही नज़र आया हमें,

तड़पते दिल के ब्यान करें कैसे ?

जब भी कुरेड़ा घाव को, दर्द उनका ही उभर आया .

शायरी नंबर तीन 

इतना प्यार ना कर के इश्क़ भी,

रो पड़ेगा तेरी वफ़ा देख कर,

तुम मिलो ना मिलो पर,

रब ज़रूर जल उठेगा,

तुम्हारा जुनून देख कर .