Tanhai Shayari

मत फेंक पानी में पत्थर,
उसे भी कोई पीता होगा,
मत रह यूँ उदास जिन्दगी में,
तुम्हें देखकर कोई जीता होगा।

 

बताओ है कि नहीं मेरे ख्वाब झूठे,
कि जब भी देखा तुझे अपने साथ देखा।

 

मौजूद थी उदासी अभी पिछली रात की,
बहला था दिल जरा कि फिर रात हो गयी।

 

ऐ नए साल बता कि तुझमें नया क्या है,
हर तरफ खल्क ने क्यूँ शोर मचा रखा है।

 

तू नया है तो दिखा, सुबह नई शाम नई,
वर्ना इन आँखों ने देखे हैं ऐसे साल कई।

 

तपिश से बच कर घटाओं में बैठ जाते हैं,
गए हुए की सदाओं में बैठ जाते हैं,
हम अपनी उदासी से जब भी घबराये,
तेरे ख़याल की छाँव में बैठ जाते हैं।

 

छोंड़ गए हमको वो अकेले ही राहों में,
चल दिए रहने वो गैर की पनाहों में,
शायद मेरी चाहत उन्हें रास नहीं आयी,
तभी तो सिमट गए वो औरों की बाँहों में।

 

हमें अपने घर से चले हुए,
सरे राह उमर गुजर गई,
न कोई जुस्तजू का सिला मिला,
न सफर का हक ही अदा हुआ।

 

देखी है बेरुखी की… आज हम ने इन्तेहाँ,
हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए।

 

बहुत लहरों को पकड़ा डूबने वाले के हाथों ने,
यही बस एक दरिया का नजारा याद रहता है,
मैं किस तेजी से जिन्दा हूँ मैं ये तो भूल जाता हूँ,
नहीं आना है दुनिया में दोबारा याद रहता है।