Tanhai Shayari

 

इतना तो ज़िंदगी में, न किसी की खलल पड़े,
हँसने से हो सुकून, न रोने से कल पड़े,
मुद्दत के बाद उसने, जो की लुत्फ़ की निगाह,
जी खुश तो हो गया, मगर आँसू निकल पड़े।

 

आधी से ज्यादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ,
अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है।

 

दुनिया भी मिली गम-ए-दुनिया भी मिली है,
वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था खुदा से।

 

वफ़ा के शीशमहल में सजा लिया मैनें,
वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैनें,
ये सोच कर कि न हो ताक में ख़ुशी कोई,
गमों की ओट में खुद को छुपा लिया मैनें,
कभी न ख़त्म किया मैंने रोशनी का मुहाज़,
अगर चिराग बुझा तो दिल जला लिया मैनें,
कमाल ये है कि जो दुश्मन पे चलाना था,
वो तीर अपने ही कलेजे पे खा लिया मैनें।

 

जहाँ भी देखा गम का साया,
तू ही तू मुझको याद आया,
ख्वाबों की कलियाँ जब टूटी,
ये गुलशन लगने लगा पराया,
दरिया जब जब दिल से निकला,
एक समंदर आँखों में समाया,
मेरे दामन में कुछ तो देते,
यूँ तो कुछ नहीं माँगा खुदाया।

 

खुश आँखों से भी अश्कों की महक आती है,
तेरे ग़म को ज़माने से मैं छुपाऊं कैसे।

 

इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए,
तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है।

 

हमें ये मोहब्बत किस मोड़ पे ले आई,
दिल में दर्द है और ज़माने में रुसवाई,
कटता है हर एक पल सौ बरस के बराबर,
अब मार ही डालेगी मुझे तेरी जुदाई।

 

अब अगर मेल नहीं है तो जुदाई भी नहीं,
बात तोड़ी भी नहीं तुमने तो बनाई भी नहीं।

 

जब तक मिले न थे जुदाई का था मलाल,
अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई।