नज़रों से नज़रे मिला कर तो देखो, किसी को अपना बना कर तो देखो !

1.
आपका ख्याल मन से न जाये तो क्या करें !
आपकी याद सताये तो क्या करें !
हर पल आपको देखने की चाहत होती है, पर रोज़ रोज़ सर्कस न जा पाऊँ तो क्या करें ।

2.
संग-ए-मरमर सा तराशा ये बदन !
नशीला सा पिघलता शबाब इसका !
होंठों से लगाओ तो कशिश कैसी है, ये कुल्फी चीज़ ही ऐसी है।

3.
जब से तुम्हें चाहा है, तब से तुम्हें पाया है !
हर दुआ में नाम तेरा ही आया है, पूछ सकूँ रब से की, “यह कैसा नमूना बनाया है”।

4.
नज़रों से नज़रे मिला कर तो देखो, किसी को अपना बना कर तो देखो !
मिलना चाहेंगे आपसे सब लोग, ‘दिन में एक बार नहा कर तो देखो’।

5.
आँसू तेरे निकले और आँख मेरी हों,
दिल धड़के तेरा और धड़कन मेरी हो।
दोस्ती हमारी इतनी गहरी हो की,
तू सड़क पर पिटे और गलती मेरी हो।