मास्टर जी (चिंटू का लंच पूरा खा लिया और डकारते हुए) : बेटा, घर जाकर मेरा नाम तो नहीं लोगे कि मैंने तुम्हारा लंच खा लिया…!

1.
राजू (बुद्धू से) : बुद्धू, किसी चीज का लंबा-सा नाम बताओ।

बुद्धू : रबड।

राजू : यह तो बहुत छोटा हैं !

बुद्धू : लेकिन इसे खींचकर जितना चाहे लंबा कर सकते हैं

2.
भिखारी : आपके पड़ोसी ने पेट भर कर खाना खिलाया है, आप भी कुछ खिला दो।

टोंनी : ये ले हाजमोला
खा।

3.
पिता (रोहित से) : देखों बेटे, जुआ नहीं खेलते ! यह ऐसी आदत हैं कि यदि इसमें आज जीतोगे तो कल हारोगे , परसों जीतोगे तो उससे अगले दिन हार जाओगे।
रोहित : बस पिताजी, मैं समझ गया ! आगे से मैं एक दिन छौड़कर खेला करूंगा।

4.
सैतान राजू : मम्मा क्या मैं भगवान की तरह दिखता हूं ?

मम्मी : नहीं, पर तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो बेटा ?

सैतान राजू : क्योंकि मैं कहीं भी जाता हूं तो सब यही कहते हैं कि हे भगवान फिर आ गया ।

5.
मास्टर जी (चिंटू का लंच पूरा खा लिया और डकारते हुए) : बेटा, घर जाकर मेरा नाम तो नहीं लोगे कि मैंने तुम्हारा लंच खा लिया…!
चिंटू (मासूमियत के साथ) : नहीं मास्टर जी, मैं घर जाकर बोल दूंगा कि “मेरा खाना कुत्ता खा गया”।