यु ही किसी पर एतबार हो जाता है, अजनबी सा कोई साक्ष्ह अपना हो जाता है

1.चाँदनी ने कहा के तू प्यार कर…
शमा ने कहा आँखें चार कर…
गोरी को छेड़ा तो बोली मुस्काराकार..
अभी तू नादान है कुछ इंतेज़ार कर

2.देखो आवाज़ देकर पास हमे पाओगे,
आ ओगे   तन्हा पर तन्हा ना जाओगे,
दूर रहकर भी तुम्ही पे नज़र है मेरी,
हाथो से थम लेंगे जब भी ठोकर खाओगे

3.जब दिल उदास हो हमसे बात कर लेना,
जब दिल चाहे मुलाक़ात कर लेना,
रहते है आपके दिल के किसी कोने मे,
वक़्त मिले तो तलाश कर लेना

4.आँखें उँची हुई तो दुआ बन गयी,
आँखें नीची हुई तो हया बन गयी,
जो झुक कर उठी तो ख़ता बन गयी,
और उठ कर झुकी तो अदा बन गयी

5.यु ही किसी पर एतबार हो जाता है..
अजनबी सा कोई साक्ष्ह अपना हो जाता है..
सिर्फ़ उसकी ख़ुसीओ से ही नही माओहब्बत..
उसकी हर अड़ाओ से प्यार हो जाता है

6.तेरी आँखों की चमक ऐसी.
जैसे अंबार मैं चमके तारा.
तेरे चेहरे का नूवर ऐसा.
जैसे चाँद का जानम दुबारा.
तू भांड आँख का खोवाब.
या जानत का कोई नज़ारा

7.साफ़ दामन का दौर तो कब का खत्म हुआ साहब
अब तो लोग अपने धब्बों पे गरूर करने लगे हैं

8.उठाते है जब यह हाथ दुआ को,
रब से तेरे लिए ही फरियाद करते है
तुम हमें भुला भी दो तो क्या,
हम तो तुम्हे हर पल याद करते है

9.गुलाब की महक भी फीकी लगती है,
कौन सी खुश्बू मुज़मे बसा गयी हो तुम,
ज़िंदगी है क्या तेरी चाहत के सिवा,
यह कैसा खाव्ब आँखो को दिखा गयी हो तुम