जानिए छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का सुनहरा इतिहाश

आज हम बात कर रहे है मुंबई के सबसे खुबसूरत स्टेशन के बारे मे जिसका नाम विक्टोरिया टर्मिनस है ये बहुत ही खुबसूरत और आकर्षित स्टेशन है इस स्टेशन को देखने के लिए हजारों-हजारों  लोग दुसरे देशो से आते है तो चलिए जाते है इस स्टेशन से जूरी कुछ बाते जिसे जानकार आपको भी बहुत अच्छा लगेगा |विक्टोरिया टर्मिनस को  शिवाजी स्टेशन भी कहा जाता है, हमेशा से मुंबई को प्रमुख व्यापारिक केंद्र है | मुंबई का एक ऐतिहासिक रेलवे-स्टेशन है, जो मध्य रेलवे, भारत का मुख्यालय भी है | इस स्टेशन की अभिकल्पना फ्रेडरिक विलियम स्टीवन्स, वास्तु सलाहकार ने की थी इसको बनाने में 1,614,000 रूपए लगे है | इसके अंतिम रूप में लंदन के सेंट पैंक्रास स्टेशन की झलक दिखाई देती है | 2 जुलाई, 2004 को इस स्टेशन को युनेस्को की विश्व धरोहर समिति द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया |

क्वीन विक्टोरिया की गोल्डन जुबली पुरे होने के उपलक्ष्य में बनाये गए इस स्टेशन का नामकरण विक्टोरिया टर्मिनस किया गया था | 1996 में कन्द्रीय रेलमंत्री ने इसका नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस कर दिया | यह मुम्‍बई में एक गोथिक शहर के रूप में पहचाना जाने लगा | विक्टोरिया स्टेशन की इमारत ‘विक्टोरियन गोथिक शैली’ में बनी है | विक्टोरिया इमारत में विक्टोरियाई इतालवी गोथिक शैली एवं परंपरागत भारतीय स्थापत्य कला का संगम झलकता है | इसके अन्दर वाले भागों में लकड़ी की नक़्क़ाशी की हुई टाइलें, लौह एवं पीतल की अलंकृत मुंडेरें व जालियां हैं | यह मुम्‍बई के लोगों का एक अविभाज्‍य अंग है, क्‍योंकि यह स्टेशन उप शहरी और लंबी दूरी रेलों का स्‍टेशन है |

टिकट-कार्यालय की ग्रिल-जाली व वृहत सीढ़ीदार जीने का रूप, बम्बई कला महाविद्यालय (बॉम्बे स्कूल ऑफ आर्ट) के छात्रों का कार्य है ये बहुत ही खुबसूरत स्टेशन है ये स्टेशन कम किसी रजा का महल ज्यादा लगता है भारत में मात्र यही एक स्टेशन है जिसकी खुबसूरत दुनिया भर में मशहुर है इसका लघु नाम वी.टी स्टेशन है |