Intezar shayari

साँसों मे मेरे कुछ अजीब सी कशिश है
आज जाना, शायद ये तुम्हारे साँसों को महसूस कर रहा है,
आँखें मेरी तुम्हारी राहों पे आके थम गयी हैं,
और ये दिल, तुम्हारे आने का इंतेज़ार कर रहा है.

कुछ पल हमारे साथ रह के तुम्हे लौट जाना था हर बार,
जाते हुए तुम्हारा मूड मूड के हमें देखना अच्छा लगा,
सालों के बाद मिला तुमसे आज मगर बस कुछ लम्हो के लिए,
उस इंतेज़ार के बाद तुमसे मिलना हमें बहुत अच्छा लगा.

बहुत हो चुका इंतेज़ार उनका,
अब और ज़ख़्म सहे जाते नही,
क्या बयान करें उनके सितम को,
दर्द उनके कहे जाते नही

फ़ासले मिटा कर आपस मैं प्यार रखना,.
दोस्ती का ये रिश्ता हमेशा बरकरार रखना,
बिछड़ जाए कभी आपसे हम,
आँखों मैं हमेशा हमारा इंतज़ार रखना

नज़रें मेरी कहीं तक ना जायें,
बेवफा तेरा इंतेज़ार करते करते,
यह जान यूँ ही निकल ना जाए,
तुम से इश्क़ का इज़हार करते करते

सुबह का इंतेज़ार था,फिर शाम तक मुझे रुकना था,
आएगी इस शाम भी मैने खुद को समझाया ,
यही सुबह से लेकर शाम तक एक पल चैन पाया नही ,
जिसका इंतेज़ार था, उस शाम वो आया नही.

तुम आये तो लगा हर खुशी आ गई यू लगा जैसे ज़िन्दगी आ गई थी,
जिस घड़ी का मुझे कब से इंतज़ार अचानक वो मेरे करीब आ गई

इंतजार उसका जिसके आने की कोई आस हो,
खुश्बू भी उस फूल की जो मेरे पास हो,
मंज़िल ना मिल सकी हमे तो कोई बात नही,
गम भी उसी शख्स का होता है जिसे प्यार का एहसास हो.

इंतज़ार हमारा करे कोई मंजिल हमारी बने कोई ,
दिल की यह आरजू है छोटी दिल में आके रहे कोई।

कोई वादा नही फिर भी तेरा इंतेज़ार है ,
जुदाई के बाद भी तुझसे प्यार है ,
तेरे चेहरे की उदासी दे रही है ,
गवाही मुझसे मिलने के लिए तू भी बेकरार है.