Intezar shayari

चाहत पर अब एतबार ना रहा,
खुशी क्या है यह एहसास ना रहा,
देखा है इन आँखोने टूटे सपनो को,
इसलिए अब किसी का इंतेज़ार ना रहा

अब हमसे इंतेज़ार नही होता इतना महेंगा ,
तो किसी का प्यार नही होता,
हम जिसके लिए हुए रुसवा ज़माने मे,
वो अब बात करने को भी तैयार नही होता

किसी के दीदार को तरसता है,
किसी के इंतेज़ार मे तडपता है,
ये दिल भी अजीब चीज़ है ,
जो होता है खुद का मगर किसी और के लिए धड़कता है .

तेरे इंतज़ार का ये आलम है,
तड़प्ता है दिल आखें भी नम है,
तेरी आरज़ू में जी रहे है,
वरना जीने की ख्वाहिश कम है

इश्क़ किया तुझसे, मेरे ऐतबार की हद थी,
इश्क़ में दे दी जान, मेरे प्यार की हद थी,
मरने के बाद भी खुली थी आँखें,
यह मेरे इंतेज़ार की हद थी

एक शाम आती है तुम्हारी याद लेकर,
एक शाम जाती है तुम्हारी याद देकर,
पर मुझे तो उस शाम का इंतेज़ार है,
जो आए तुम्हे साथ लेकर..!!

कौन है यहाँ जो अब मुझपे एतबार करता है
मेरा अक्स मुझे पहचानने से इनकार करता है
खंजर लिए हाथों में खड़ा है
दर्द मेरा वो मेरे क़त्ल के लिए मेरा इंतेज़ार करता है

कत्मे अदम से उनका हमें इन्तिज़ार है !
लगता है हर दियार, उन्ही का दियार है !!
हारे हैं बार-बार बुला कर तुम्हें, सनम !
अब आ भी जाइये, कि, जिगर बेक़रार है !!

जान से भी ज़्यादा उन्हे प्यार किया करते थे,
याद उन्हे दिन रत किया करते थे,
अब उन राहो से गुज़रा नही जाता,
जहा बैठ कर उनका इंतेज़ार किया करते थे.!

कौन कहता है इश्क़ मे बस इकरार होता है,
कौन कहता है इश्क़ मे बस इनकार होता है,
तन्हाई को तुम बेबसी का नाम ना दो,
क्यूंकी इश्क़ का दूसरा नाम ही इंतेज़ार होता है.