Intezar shayari

मे इंतेज़ार मे हूँ की कब टूटेगी तेरी खामोशी,
तुम इंतेज़ार मे हो की नही देख मेरी खामोशी दर्द उठता है ,
दिल मे सुरलहर की तरह मे किस तरह बयान करूँ रोटी हुई खामोशी .

नज़र चाहती है दीदार करना,
दिल चाहता है प्यार करना,
क्या बतायें इस दिल का आलम,
नसीब में लिखा है इंतेज़ार करना.

बदलना आता नही हमको मौसमो की तरह,
हर एक रूप में तेरा इंतजार करते है,
ना तुम समेत सकोगी जिसे क़यामत,
कसम तुम्हारी तुम्हे इतना प्यार करते है.

अपने जज़्बात दफ़न किए बैठे हैं,
दिल के अरमान छुपाए बैठे हैं,
थक गये हैं अपनी इस ज़िंदगी से,
अब मौत का इंतेज़ार किए बैठे हैं.

इस नज़र को तेरा इंतेज़ार रहता है ,
दिल तुमसे मिलने को बेक़रार होता है,
तुम हमसे मिलो ना मिलो ,
फिर भी इस दिल मैं तेरी दोस्ती का प्यार रहता है

कौन कहता है इश्क़ मे बस इकरार होता है ,
कौन कहता है इश्क़ मे बस इनकार होता है,
तन्हाई को तुम बेबसी का नाम ना दो,
क्यूंकी इश्क़ का दूसरा नाम ही इंतेज़ार होता है

ज़िंदगी हसीन है ज़िंदगी से प्यार करो,
है रात तो सुबह का इंतज़ार करो,
वो पल भी आएगा जिसका इंतज़ार है ,
आप को, रब पर भरोसा और वक़्त पे ऐतबार रखो .

भले ही राह चलते का दामन थाम ले,
मगर मेरे प्यार को भी तू पहचान ले,
कितना इंतेज़ार किया है तेरे इश्क़ में,
ज़रा यह दिल की बेताबी तू जान ले..

बहुत हो चुका इंतेज़ार उनका,
अब और ज़ख़्म सहे जाते नही,
क्या बयान करें उनके सितम को,
दर्द उनके कहे जाते नही

इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा यादें काटती हैं,
ले-ले के नाम तेरा मुद्दत से बैठे हैं ,
तेरे इंतज़ार में कि आज आयेगा कोई पैगाम तेरा!

वो कह कर गया था मैं लौटकर आउंगा,
मैं इंतजार ना करता तो क्या करता,
वो झूठ भी बोल रहा था बड़े सलीके से,
मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता।