Intezar shayari

फूलो से सजे गुलशन की ख्वाइश थी हमें,
मगर जीवनरूपी बाग़ में खिल गए कांटे.
अपना कहने को कोई नहीं है यहाँ,
दिल के दर्द को हम किसके साथ बांटे

इंतज़ार तो हम भी काइया करते हैं
आपसे मिलने की आस काइया करते हैं ,
मेरी याद हिचक़ियो की मोहताज़ नही,
हम तो आपको सांसो से याद करते हैं

किसी को मेरी याद आए एक अरसा हुआ,
कोई है हैरान तो कोई तरसा हुआ.
इस तरह खामोश हैं ये दिल ये आँखे मेरी,
जैसे खामोश हो कोई बदल बरसा हुआ.

इंतेज़ार रहता है हर शाम तेरा,
रातें काट ते है ले ले के नाम तेरा,
मुद्दत से बैठी हू ये आस पाले,
शायद अब आ जाए कोई पैगाम तेरा

जीना चाहता हूँ मगर जिनदगी राज़ नहीं आती ,
मरना चाहता हूँ मगर मौत पास नहीं आती ,
उदास हूँ इस जिनदगी से ,
क्युकी उसकी यादे भी तो तरपाने से बाज नहीं आती ..

तेरे इंतजार में यह नज़रें झुकी है,
तेरा दीदार करने की चाह जागी है,
ना जानू तेरा नाम,
ना तेरा पता ना जाने कक्यों इश्क,
पागल दिल में एक अंजानी सी बेचैनी जागी है !

हमारे बिन अधूरे तुम रहोगे,
कभी चाहा था किसी ने,तुम ये खुद कहोगे,
न होगे हम तो किसी ने ,तुम ये खुद कहोगे,
मिलेगे बहुत से लेकिन कोई हम सा पागल ना होगा.

निकलते है तेरे आशिया के आगे से,
सोचते है की तेरा दीदार हो जायेगा,
खिड़की से तेरी सूरत न सही तेरा साया तो नजर आएगा

इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है,
खामोशियो की आदत हो गयी है,
न सीकवा रहा न शिकायत किसी से,
अगर है तो एक मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हो गई है..!

याद तेरी आती है क्यो.यू तड़पाती है क्यो?
दूर हे जब जाना था.. फिर रूलाती है क्यो?
दर्द हुआ है ऐसे, जले पे नमक जैसे.
खुद को भी जानता नही, तुझे भूलाऊ कैसे?

रोती हुई आँखो मे इंतेज़ार होता है,
ना चाहते हुए भी प्यार होता है,
क्यू देखते है हम वो सपने,
जिनके टूटने पर भी उनके सच होने का इंतेज़ार होता है? ..