जानें “इंडिया गेट” से जुडी कुछ रोचक बातें

आज हम आपको डेल्ही के इंडिया गेट के बारे में बताने जा रहे है जो आपको शायद नहीं पता हो, तो चलिए शुरू करते है| इंडिया गेट दिल्ली का ही नहीं पुरे भारत का महत्‍वपूर्ण स्‍मारक है| भारत का एक अभिन्न अंग है जो शहीदों को समर्पित है| नई दिल्‍ली के मध्‍य चौराहे में 42 मीटर ऊंचा इंडिया गेट है जो मेहराबदार “आर्क-द ट्रायम्‍फ” के रूप में है| नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित एक विशाल द्वार है, इंडिया गेट की डिज़ाइन इसके फ्रांसीसी प्रतिरूप स्‍मारक आर्क- डी-ट्रायोम्‍फ के समान है| इस स्‍मारक में अफगान युद्ध-1919 के दौरान पश्चिमोत्‍तर सीमांत (अब उत्‍तर-पश्चिम पाकिस्‍तान) में मारे गए 13516 से अधिक ब्रिटिश और भारतीय सैनिकों के नाम अंकित है|इन्ही सैनिकों के सम्मान के लिए इंडिया गेट का निर्माण किया गया था| यह इमारत लाल पत्‍थर से बनी है जो एक विशाल ढांचे के मंच पर खड़ी है| इंडिया गेट के तल पर एक अन्‍य स्‍मारक, अमर जवान ज्‍योति है, जिसे स्‍वतंत्रता के बाद जोड़ा गया था| आजादी से पहले इंडिया गेट के सामने सिर्फ किंग जॉर्ज वी की ही प्रतिमा स्थापित थी, जिसे आजादी के बाद हटा दिया गया था|

इस ईमारत को देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते है| इसके आस पास हरे भरे मैदान, बच्‍चों का उद्यान और प्रसिद्ध बोट क्‍लब है| रात में  इंडिया गेट को फ्लडलाइट से जगमगाया जाता है जबकि समीपवर्ती फव्वारों को रोशनियों से जगमगाते हैं|  यह राजपथ के सामने के छोर पर स्थित है और इसके आस-पास के क्षेत्र को सामान्‍यत: इंडिया-गेट कहा जाता है| हर साल गणतंत्र दिवस पर निकलने वाली परेड राष्ट्रपति भवन से शुरू होकर इण्डिया गेट से होते हुए लाल किले तक जाती है|1924 में ये मार्ग शुरू हुआ था|