जानें “ताज उल मस्जिद” से जुडी कुछ रोचक बातें

आज हम बात कर रहे है एक प्राचीन मस्जिद के बारे में जिसकी चर्चा पुरे दुनिया भर में है ये मस्जिद भोपाल में स्थित है जिसका नाम ताज -उल मस्जिद तो चलिए इसके बारे में हम आपको विस्तार से बताते है|ताज उल मस्जिद मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में स्थित है| ये मस्जिद भारत के सबसे प्रसिद्ध और विशालतम मस्जिदों में से यह एक है, भोपाल में ताज – उल – मस्जिद शहर में मुस्लिमों के लिए महत्‍वपूर्ण स्‍थान है और एक प्रमुख लैंडमार्क भी है| इस मस्जिद का इतिहास 300 साल पुराना है, इस मस्जिद का निर्माण कार्य भोपाल के आठवें शासक शाहजहां बेगम के शासन काल में प्रारंभ हुआ था लेकिन  धन की कमी के कारण ये बन न सकी थी जिसके बाद 1971 में भारत सरकार ने इस मस्जिद को पूरी तरह से बनाकर तैयार किया था|

ढाई सीढ़ी मस्जिद को भोपाल शहर के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने बनवाया था ताकि बुर्ज पर मौजूद सिपाही पहरेदारी के दौरान ही नमाज पढ़ सकें| ताज-उल-मस्जिद एशिया की सबसे विशाल मस्जिदों में से एक है| जो एक विशाल मैदान में बनी हुई है|  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित इस मस्जिद को “अल्लाह का गुम्बद” भी कहा जाता है| ताज-उल-मस्जिद कुल 23,312 वर्ग फीट के मैदान पर फैली हुई है जिसकी मीनारे तक़रीबन 206 फीट ऊँची है|

इस मस्जिद में 3 विशाल गोलाकार आकर के गुम्बद है| इस मस्जिद का लोटनेवाला आकार ही इसका सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र है| ताज उल मस्जिद में सुर्ख लाल रंग की मीनारें हैं, जिनमें सोने के स्पाइक जड़े हैं| इसके चारों ओर दीवार है और बीच में एक तालाब है, जो बहुत ही खुबसूरत है इस मस्जिद को देखने के लिए मुस्लमान दूर-दूर देशो से आते है| ताज-उल-मस्जिद के प्रवेश द्वार के चार मेहराबें हैं जिसमे मुख्य प्रार्थना हॉल में जाने के लिए 9 प्रवेश द्वार हैं | गुलाबी पत्थर से बनी इस मसजिद में दो विशाल सफ़ेद गुंबद हैं | मोतिया तालाब और मस्जिद को मिलकर इसका कुल क्षेत्रफल 14 लाख 52 हजार स्केयर फीट है|