Sharabi Shayari

नशा मोहब्बत का हो या शराब का,
होश दोनों में खो जाते है फर्क सिर्फ इतना है ,
की शराब सुला देती है और मोहब्बत रुला देती है.

तोफहे में मत गुलाब लेकर आना मेरी कब्र पर,
मत चिराग लेकर आना बहुत प्यासा हूँ ब,
रसो से मैं जब भी आना शराब लेकर आना.

गम इस कदर भरे है की मैं घबरा के पी गया,
इस दिल की बेबसी पर तरस खा के पी गया ,
ठुकरा रहा था मुझको बड़ी देर से जहान मैं,
आज सब जहान को ठुकरा के पी गया.

हर किसी बात का जवाब नहीं होता,
हर जाम इश्क में ख़राब नहीं होता,
यूँ तो झूम लेते है नशे में रहने वाले,
मगर हर नशे का नाम शराब नहीं होता.

महकता हुआ जिस्म तेरा गुलाब जैसा है ,
नींद के सफर में तू ख्वाब जैसा है,
दो घूँट पी ले दे आँखों की मस्तियाँ,
नशा तेरी आँखों का शराब के जाम जैसा है.

काश हमें भी कोई समझाने वाला होता
तो आज हम इतने नासमझ ना होते
काश कोई इश्क का जाम पिलाने वाला होता
तो आज हम भी शराब के दीवाने ना होते…

मैं तलख़िये हयात से घबरा के पी गया
गम की सियाह रात से घबरा के पी गया
इतनी दक़ीक़ से कोई कैसे समझ सके
यज़्दें के वाक़ियात से घबरा के पी गया…

महफ़िल – ऐ -इश्क सजाओ
तो कोई बात बने दौलत-ऐ -इश्क लुटाओ
तो कोई बात बने जाम हाथों से नहीं है
पीना मुझको कभी आँखों से पिलाओ तो कोई बात बने

शराब सरीर को ख़तम करती है
शराब समाज को ख़तम करतई है ,
आओ आज इस शराब को ख़तम करते हैं ,
एक बोतल तुम खत्म करो , एक बोतल हम ख़तम करते है

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ,
सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ,
जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश,
मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ।